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कृति देव और यूनिकोड में क्या फ़र्क़ है

अंतिम बार देखा गया: 2026-09-07

दोनों में हिन्दी दिखती है, तो फ़र्क़ क्या है? फ़र्क़ यह है कि कंप्यूटर के अंदर क्या रखा है।

यूनिकोड में क्या होता है

यूनिकोड में "क" के लिए कंप्यूटर के पास "क" का अपना नंबर होता है। दुनिया भर में वही नंबर। इसलिए फाइल जिस भी कंप्यूटर, मोबाइल या वेबसाइट पर खुले, हिन्दी हिन्दी ही रहती है।

और चूँकि कंप्यूटर जानता है कि यह हिन्दी का "क" है, इसलिए ढूँढना (Ctrl+F) काम करता है, स्पेल चेक काम करता है, गूगल उसे पढ़ लेता है, और स्क्रीन रीडर बोल देता है।

कृति देव में क्या होता है

कृति देव में "क" के लिए कोई अलग नंबर नहीं है। वहाँ अंग्रेज़ी का d रखा जाता है, और फॉन्ट उसकी जगह "क" की आकृति बना देता है। फाइल के अंदर अंग्रेज़ी है, आँख को हिन्दी दिखती है।

यही वजह है कि कृति देव वाली फाइल में Ctrl+F से "कार्यालय" ढूँढने पर कुछ नहीं मिलता। कंप्यूटर के लिए वहाँ "कार्यालय" है ही नहीं, वहाँ dk;kZy; है।

एक नज़र में

क्या कृति देव यूनिकोड
फॉन्ट इंस्टॉल करना पड़ता है?हाँनहीं
मोबाइल पर सही दिखेगी?नहींहाँ
Ctrl+F से ढूँढ सकते हैं?नहींहाँ
व्हाट्सएप/ईमेल में चिपकाने पर?कूड़ा दिखता हैसही दिखता है
गूगल पढ़ पाएगा?नहींहाँ
पुराने प्रेस/सॉफ़्टवेयर चलेंगे?हाँकभी-कभी नहीं

तो कृति देव अब भी क्यों चल रहा है

क्योंकि बहुत कुछ उसी पर टिका है। प्रिंटिंग प्रेस, पुराने डीटीपी सॉफ़्टवेयर, टाइपिंग परीक्षाएँ, और दफ़्तरों में सालों से बनी लाखों फाइलें। जिस दिन कोई कहता है "फाइल कृति देव में भेजिए", उसकी वजह आमतौर पर यही होती है कि आगे की कोई मशीन या आदमी उसी की उम्मीद कर रहा है।

और सच यह भी है कि रेमिंगटन लेआउट पर बरसों टाइप करने वाले की उँगलियाँ उसी को जानती हैं। यूनिकोड में इनस्क्रिप्ट लेआउट अलग है।

फिर करना क्या चाहिए

जो फाइल आगे किसी को भेजनी है, पोर्टल पर चढ़ानी है, या सालों बाद ढूँढनी है — उसे यूनिकोड में रखिए। जो सिर्फ़ छपने जा रही है और छापने वाला कृति देव माँग रहा है — उसे कृति देव में दीजिए।

दोनों तरफ़ बदलना मुश्किल नहीं है। बस टेक्स्ट कॉपी-पेस्ट करने से काम नहीं चलेगा, क्योंकि उससे टेबल और फॉर्मेटिंग हाथ से निकल जाती है।

पूरी .docx या .xlsx फाइल दोनों दिशाओं में बदलिए — टेबल, फोटो, हेडर-फुटर और रंग जस के तस।

फाइल कनवर्ट कीजिए

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